जशपुर – कैसे साधेगी अल्पसंख्यकों का मत…पांच साल के सियासी सुख के बाद कांग्रेस की अग्नि परीक्षा… पढ़िए पूरी खबर

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जशपुर – छत्तीसगढ़ प्रदेश में लम्बे अंतराल के बाद मिले सत्ता के दरमियान कांग्रेस सरकार ने यूं तो पुरे प्रदेश में विकास की गंगा बहाई पर भाजपा के गढ़ कहे जाने वाले जशपुर विधानसभा में “विकास वाली गंगा माई” को कुछ विशेष समुदायों की बस्तियों तक पहुंचने से पहले ही भाजपाई मतदाताओं को रिझाकर अपने पाले में खिंचने के ध्येय से जहां विकास की गंगा बह चुकी थी वहीं “विकास वाली गंगा माई” दुबारा बहा दी गईं !

अब कांग्रेस के लिए परिस्थितियां विपरीत होती नज़र आ रही हैं क्योंकि जिन बहुसंख्यक बस्तियों में “विकास वाली गंगा माई” को बार बार बहाया गया वहां जल की अधिकता से दलदल और किचड़ों की भरमार हो गई और कमल खिलने के आसार नज़र आने लगे हैं !
और जिन अल्पसंख्यकों को कांग्रेस अपनी जागीर समझती थी उनके हिसाब से अबकी बार कांग्रेस के लिए अकाल साबित होगी क्योंकि जशपुर विधानसभा में निवासरत अल्पसंख्यक समुदाय लगभग मुखर होकर कांग्रेसी जनप्रतिनिधियों के विरोध में बोलती नज़र आ रही है !

विधानसभा क्षेत्र में निवासरत अल्पसंख्यक बुरी तरह से उखड़े नज़र आ रहे हैं, नाम उजागर ना करने की शर्त पर कइयों का कहना है – कांग्रेस की सरकार हम अल्पसंख्यकों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी, जितने उपेक्षित जशपुर विधानसभा के अल्पसंख्यक इन पांच सालों में हुए हैं उतने तो कभी अन्य सरकारों के शासनकाल में भी नहीं हुए !

साफ शब्दों में कहा जाए तो अल्पसंख्यक समुदाय इन पांच सालों के राजनीतिक कार्यप्रणाली से बिल्कुल भी संतुष्ट नजर नहीं आ रहा है खासकर लोकल जनप्रतिनिधियों ने जिस प्रकार अल्पसंख्यकों को उपेक्षित किया है उसके बाद तो अल्पसंख्यक समुदाय का कांग्रेसी खेमे की ओर सटना लगभग असम्भव सा लग रहा है !
यहां मैं असम्भव शब्द का प्रयोग इसलिए कर रहा हूं क्योंकि अल्पसंख्यक समुदाय के नाराज़गी को दुर करने का प्रयास भी विधानसभा जशपुर के कांग्रेसी प्रतिनिधित्व के द्वारा किया जाना नज़र नहीं आ रहा है !
बहरहाल जशपुर विधानसभा क्षेत्र की फिजाओं में एक अजीब सी शांति छाई हुई है जिसे बुढ़े बुजुर्ग जलजला बरपने से पहले की शांति बता रहे हैं !
बस कुछ दिनों की बात है उसके बाद चुनावी चें पों शुरू हो जाना है, आम जनता को इंतज़ार है दोनों मुख्य पार्टियों के उम्मीदवारों के नाम घोषित किए जाने का !

वैसे जिले में अबकी चुनाव में दो की जगह तीन पार्टी प्रत्याशियों के बीच टक्कर होने की बात चर्चा में आम है, तीसरी पार्टी के बारे में पाठक समझ ही गए होंगे वही झाड़ू वाले भाई जिन्होंने अबके विधानसभा चुनावों में छत्तीसगढ़ प्रदेश में भी झाड़ू मारकर कचरा साफ करने का मन बना लिया है !
बहरहाल इंतज़ार कीजिए वक्त करीब है, अंत में सिर्फ दो पंक्तियां लिखुंगा “होइहैं उहई, जो राम रची राखा” !

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