✍️ पुरा छत्तीसगढ़ प्रदेश इन दिनों भीषण गर्मी की आग में झुलस रहा है, गर्म हवाओं के थपेड़ों को देखते हुए राज्य सरकार ने लु को लेकर “यलो अलर्ट” जारी कर दिया है !
स्वयं प्रदेश के मुखिया सोशल मीडिया एवं टीवी चैनलों के माध्यम से प्रदेशवासियों से गर्मी से बचने की अपील करते नज़र आ रहे हैं ! अब ऐसे आग लगाऊ गर्मी में यदि पानी की किल्लत हो तो समझिए नरक की यातना भोगने जैसी परिस्थिति उत्पन्न हो जाती है ! और लगभग उसी नरक के यातनाओं जैसी परिस्थितियों से जुझ रहा है इन दिनों छत्तीसगढ़ का शिमला कहा जाने वाला तहसील मुख्यालय सन्ना

छत्तीसगढ़ प्रदेश के झारखण्ड राज्य से लगे सीमावर्ती जिला जशपुर के सबसे खूबसूरत तहसीलों में शुमार, विकासखण्ड बगीचा के अन्तर्गत आने वाला ग्राम पंचायत सन्ना जिसके बारे में कहा जाता था कि “यहां जेठ की गर्मी में भी एक कम्बल की ठण्ड पड़ती है” ! पर जिस प्रकार से पाठक्षेत्र में भु माफियाओं और लकड़ी तस्करों के द्वारा धड़ल्ले से वनों की कटाई की गई है साथ ही रही सही कसर यहां के रहवासियों ने भी “पुटू और खुखड़ी” की चाह में वनों को आग के हवाले करके पुरी कर दी है !
अब ऐसे में “एक कम्बल की ठण्ड” की आस रखना शाय़द बेमानी ही होगी, क्योंकि यहां जैसी करनी वैसी भरनी वाली कहावत का चरितार्थ होना लाजिमी है !
बहरहाल बात करते हैं ग्राम पंचायत सन्ना में पेयजल आपूर्ति को लेकर.. सर्वप्रथम तो पाठकों को जानना होगा कि सन्ना की लगभग एक तिहाई आबादी जल आपूर्ति के लिए सिर्फ़ और सिर्फ़ पंचायत द्वारा सप्लाई की जाने वाली नल के पानी पर निर्भर रहती है ! सन्ना के कुछेक धनाढ्य परिवारों जिनके पास व्यक्तिगत जल आपूर्ति की व्यवस्था है, को छोड़कर लगभग पन्द्रह सोलह वार्ड के रहवासियों का नहाना धोना पीना दिनचर्या में होने वाले जल की पुर्ती सिर्फ़ पंचायत से मिलने वाले पानी के भरोसे टिकी होती है पर कहना अनुचित नहीं होगा कि पंचायत कर्मियों की लापरवाही के चलते इतनी भीषण गर्मी में जलापूर्ति नहीं होने के कारण यहां के नागरिकों को जलसंकट से जुझना पड़ रहा है !

ज्ञातव्य हो ग्राम पंचायत सन्ना में जल आपूर्ति के लिए दो बड़ी टंकियां बनी हुई हैं एक सन्ना के बस स्टैंड (यात्री वाहन विराम स्थल) में और दुसरी सन्ना के हृदय स्थल “नगरटोली” में, इन्हीं दो टंकियों के भरोसे जलापूर्ति के लिए आश्रित है सन्ना की एक तिहाई आबादी और हां आपको जानकर ख़ुशी होगी कि हमारे देश के यशस्वी प्रधानमंत्री माननीय नरेन्द्र दामोदरदास मोदी जी की अति महत्वाकांक्षी नल जल योजना के अन्तर्गत सम्पूर्ण पंचायत क्षेत्र में नल भी लगे हुए हैं पर परिणाम वही “ढाक के तीन पात” !

जाड़े और बरसात के दिनों में तो ग्रामीण पानी को लेकर पंचायत की लापरवाही को नजरंदाज कर देते हैं पर ऐसी आग बरसाती गर्मी में क्या करें जब मिर्च और टमाटर की खेती ने नदी नालों को भी जल विहीन कर दिया है !
सन्ना को खेती किसानी के क्षेत्र में देशव्यापी पहचान दिलाने वाले किसान खुद परेशान हैं कि ऐसे जलसंकट में खेती कैसे हो, खैर किसान तो उचित विकल्प की तलाश कर ही लेते हैं क्योंकि उनके जीवनयापन हेतु धनोपार्जन के लिए खेती ही मुलकार्य है !
पर आम नागरिक क्या करें जब ग्राम पंचायत में जलापूर्ति के सभी साधनों के मुह्हैया होते हुए भी सिर्फ़ जिम्मेदार पंचायत पदाधिकारियों कर्मचारियों के लापरवाही के कारण जलसंकट की नारकीय यातनाओं से जुझ रहे हैं !

ग्रामीणों के कथन अनुसार पंचायत कर्मियों की लापरवाही अब हद से गुजरती जा रही है क्योंकि बीन भोजन रहा जा सकता है किन्तु बिना पानी इस भीषण गर्मी में दिन गुजारना संभव नहीं है, पंचायत पदाधिकारियों के द्वारा परिस्थिति में यदि तात्कालिक सुधार नहीं की जाती है तो ग्रामीण पेयजल आपूर्ति की समस्या तथा पंचायत के लापरवाह रव्वैये को लेकर जिले के यशस्वी कलेक्टर डॉ रवि मित्तल जी से मिलेंगे और ग्राम पंचायत सन्ना के समस्याओं से उन्हें रु ब रु कराकर तात्कालिक निराकरण की मांग करेंगे !








