सुदंर स्वच्छ वातावरण के निर्माण और पर्यावरण संरक्षण के लिए वृक्ष हैं बेहद जरूरी कैसे ? पढ़ें पूरी ख़बर

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पहाड़ों, पठारों, नदी-नालों, घने जंगलों और हरी-भरी वनस्पतियों से समृद्ध जशपुर जिले की प्राकृतिक सौंदर्य सहज ही आकर्षित करता है। जंगल और इनमें प्राकृतिक तौर पर बसने वाले पशु-पक्षियों से ऐसा पारिस्थितिक तंत्र का निर्माण होता है जो जीवन के लिए अनुकूल होने के साथ ही पर्यावरण संरक्षण के लिए भी बेहद जरूरी है। जीवन के लिए सबसे जरूरी शुद्ध वायु, पेड़ों का कटाव रोकने और पर्यावरण अनुकूलता बनाए रखने के लिए जनजागरूकता अभियान के तहत प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर एक पेड़ मां के नाम से वृक्षारोपण की शुरूआत की थी।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने 4 जुलाई को अपने निवास कार्यालय परिसर रायपुर में दहीमन का पौधा लगाकर एक पेड़ मां के नाम का विधिवत शुभारंभ किया था। इस महाअभियान के तहत अब तक जशपुर जिले में 3 लाख 55 हजार पौधों का रोपण और 2 लाख 32 हजार पौधों का वितरण किया जा चुका है। एक पेड़ मां के नाम के तहत हर व्यक्ति को अपनी मां के सम्मान में एक पौधा लगाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ मातृत्व का सम्मान, हरे-भरे परिदृश्य को और अधिक हराभरा बनाना है।मुख्यमंत्री ने इस अभियान के तहत वृक्षारोपण स्थलों का नामकरण स्थानीय देवी-देवताओं के नाम से करने का आह्वान किया है। इस अभियान के तहत आम, जामुन, बेल, कटहल, सीताफल, अनार, शहतूत, बेर, तेन्दू, गंगाईमली जैसे फलदार पौधे तथा लघु वनोपज एवं औषधीय प्रजाति के पौधों जैसे-हर्रा, बहेड़ा, आंवला, नीम, पुत्रजीवा, काला सिरस, रीठा, चित्रक आदि प्रजातियों के पौधों का रोपण हो रहा है। शहरी क्षेत्रों में छायादार प्रजातियां बरगद, पीपल, मौलश्री, कदम, पेल्ट्राफार्म, गुलमोहर, करंज, अशोक, अर्जुन के साथ अन्य प्रजातियों का रोपण किया जा रहा है। अभियान अंतर्गत सभी स्कूलों, छात्रावासों, आंगनबाड़ी केन्द्र, पुलिस चौकी, अस्पताल, शासकीय परिसर, शासकीय एवं अशासकीय भूमि, विभिन्न औद्योगिक संस्थानों की रिक्त भूमि पर इस महावृक्षारोपण अभियान के अंतर्गत वृक्षारोपण का कार्य किया जा रहा है। वर्तमान समय में वनों की कटाई और प्रदूषण की बढ़ती समस्या की वजह से जनजीवन प्रभावित होने के साथ ही बीमारियां भी बढ़ रही है। यह अभियान पर्यावरण संरक्षण के साथ ही अपनी मां के प्रति अपने प्रेम और सम्मान को व्यक्त करने का भी एक माध्यम है। अभियान छत्तीसगढ़ के लोगों को प्रकृति के प्रति जागरूकता फैलाने के अलावा उन्हें अपनी जड़ों से जोड़ने का काम भी कर रहा है। ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान की आक्सीजन की मात्रा बढ़ाने, धरती का तापमान कम करने, भूजल स्तर को बढ़ाने और प्रदूषण नियंत्रण में भी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। यह हमें एक हरित और स्वच्छ भविष्य की ओर ले जाएगा।

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