“डॉक्टर शबाना प्रवीन” (डॉक्टर ऑफ फिलॉस्फी) कामयाबी की दास्तान ..पढ़ें पूरी ख़बर

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11 नंवबर सन् 1990, हिन्दुस्तान का दिल कहे जाने वाले अविभाजित मध्यप्रदेश के रायगढ़ जिले का एक सूदूर वनांचल गांव ” सन्ना ” !
सन्ना जिसकी चारों दिशाएं घने जंगलों से भरी हुई, प्राकृतिक सुन्दरता से लबालब एक खुशहाल ग्राम पंचायत कहलाता था !
जहां एक सरल व्यक्तित्व के धनी, पेशे से पीडब्ल्यूडी विभाग में टाइमकीपर के पद पर पदस्थ श्री अफजल हुसैन (हरीश भैय्या) जी निवास करते हैं ! अफ़ज़ल हुसैन जी एक बड़े सामुहिक परिवार के मुखिया भी हैं साथ ही अपने समाज के वरिष्ठ सलाहकार भी हैं !
11 नंवबर सन् 1990 (रविवार) की “सर्द” शाम के करीब 8:30 बजे उनके आंगन में एक किलकारी गुंजी, जिसने पुरे मोहल्ले को खुशियों से भर दिया ! घर आंगन को खुशहाली से भरने वाली अपनी उस किलकारी का नाम उन्होंने बहुत ही मोहब्बत से रखा ” शबाना ” !
उस सर्द रात को बिते लगभग 34 सालों बाद शबाना ने “डॉक्टर शबाना प्रवीन” (डॉक्टर ऑफ फिलॉस्फी) की उपाधि लेकर एक बार फिर से न केवल परिवार, मोहल्ला बल्कि पुरे गांव को खुशियों से भर दिया है !

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शबाना बचपन से ही चंचल प्रवृत्ति की होने के कारण पढ़ाई में बहुत तेज रहीं हैं प्राथमिक से लेकर उच्चतर माध्यमिक स्तर की शिक्षा उन्होंने अपने गृह ग्राम सन्ना के शासकीय विद्यालय से प्राप्त की ! ज्ञातव्य हो उच्चतर माध्यमिक विद्यालयीन शिक्षा के दरमियान अच्छे अंक प्राप्त कर उन्होंने अपने विद्यालय “शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सन्ना” के नाम को रौशन किया था !

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शिक्षा के प्रति उनकी लगन और मेहनत को देखते हुए उनके पिता श्री अफजल हुसैन जी ने उच्च शिक्षा के लिए उनका दाखिला बिलासपुर शहर के “बिलासा गर्ल्स कॉलेज” में कराया !
शिक्षा प्राप्ति की अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और संकल्प को चरितार्थ करते हुए शबाना प्रवीन ने बिलासा गर्ल्स कॉलेज में अध्ययन करते हुए बी.ए.सी. तथा एम.एस.सी. की डिग्री हासिल की साथ ही बीएड का डिप्लोमा प्राप्त किया !
जिसके बाद एम फील करने के पश्चात उन्होंने पी.एच.डी. डॉ सी.वी.रमन विश्वविद्यालय करगी रोड कोटा जिला बिलासपुर से डॉ मनीष उपाध्याय, रजिस्ट्रार आई.सी.एफ.आई.ए. युनिवर्सिटी रायपुर के निर्देशन में रासायन शास्त्र के – “सरफेश एसीमिलेशन स्टडीज ऑन दी रिमुवल ऑफ टाक्सिक मेटल आयन्स ऑन एक्टिव कार्बन एण्ड फ्लाइ एश फ्रॉम वेस्ट वाटर” विषय पर उन्हें डॉक्टर ऑफ फिलॉस्फी की उपाधि प्रदान की गई है !

किसी बुद्धिजीवी ने सही ही कहा है “सपना एक देखोगे मुश्किलें हजार आयेगी, पर वो मंज़र बड़ा खूबसूरत होगा जब कामयाबी शोर मचाएगी !!

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बहरहाल आज डॉ शबाना प्रवीन जशपुर जिले के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मुड़केला में व्याख्याता (विषय -रसायनशास्त्र) के पद पर पदस्थ हैं और विद्यालय में अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों के दिमाग से रसायनशास्त्र की जटिलताओं को मिटाने का कार्य कर रहीं हैं !
डॉक्टर शबाना प्रवीन के शोध कार्य यकीनन उन विद्यार्थियों के विद्यार्जन में भी सहायक सिद्ध होंगे !

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