दर दर भटकते जनता जनार्दन को मिले सम्पूर्ण न्याय, सही मायनों में तब सुशासन….पढ़ें पूरी लेखनी

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✍️ जशपुर जिले के विकासखण्ड बगीचा अंतर्गत ग्राम पंचायत कामारिमा के आश्रित ग्राम सेंधवार के लोगों से मुलाकात हुई, मुलाकात के लिए जितने भी ग्रामीण आए हुए थे सभी बिल्कुल सीधे साधे, भीड़ में शामिल कुछ ग्रामीण ३री, ४थी, तक पढ़े हुए, एकाध दो ग्रामीण उच्चतर माध्यमिक शिक्षा प्राप्त वो भी पाठ के विद्यालयों से तो कुछ निरे अनपढ़, पर सभी ग्रामीणों में जबरजस्त खुद्दारी और ईमानदारी !
कुछ देर की हंसी ठिठोली के बाद जब मैंने उनके इस तरह एक साथ तहसील मुख्यालय आने कारण जानना चाहा तो उन्होंने जो बातें बताईं सुनकर मन विचलित हो उठा !
आज जब पुरा प्रदेश सुशासन त्योहार मनाने की तैयारियों में व्यस्त है तो फिर कैसे ये गरीब ग्रामीण न्याय की तलाश में भटक रहे हैं ?
सर्वप्रथम आइए जानते हैं कि आखिर मामला क्या है और गरीब जनता क्यों जिम्मेदार अधिकारियों की खोज में तहसील मुख्यालय पहुंचीं, ये अलग बात है कि जानकारी के अभाव में वे शासकीय अवकाश के दिन न्याय की तलाश में तहसील मुख्यालय सन्ना पहुंचे थे !
जनता जनार्दन से मिली टुटी फुटी जानकारी को मैं शब्दों में पिरोकर पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहा हूं इसमें मैं किस हद तक कामयाब हो पाता हूं ये पाठकों को तय करना है !

मामला वन भूमि पर भूमाफियाओं के अवैध क़ब्ज़े तथा संबंधित विभाग के एक कर्मचारी की संलिप्तता की है, ग्रामीणों के कथन अनुसार ग्राम पंचायत कामारिमा के आश्रित ग्राम सेंधवार के निचले हिस्से में जहां से सिरसा नदी निकलती है, के आस पास ग्रामीणों के स्वामित्व वाली भूमि स्थित है जहां पर खेती बाड़ी करके गरीब ग्रामीण अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं ! ग्रामीणों के स्वामित्व वाली भूमि के बाद वन विभाग की भूमि है और उसी वन विभाग की भूमि पर पाठक्षेत्र के एक दबंग व्यक्ति के द्वारा अवैध रूप से कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है, जिसका सिधा सिधा नुकसान ग्रामीणों की भूमि पर नजर आ रहा है क्योंकि भूमाफियाओं के द्वारा जेसीबी वाहन से वन भूमि की खोदाई कर मिट्टी सिधे तौर पर ग्रामीणों के खेतों में डाल दिया जा रहा है, और जहां तक मिट्टी की पटाई हो रही है दबंगों के द्वारा उस भूमि पर अपना आधिपत्य स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है !
ग्रामीणों के अनुसार भूमाफियाओं के इस कृत्य में वन विभाग के पण्ड्रापाठ क्षेत्र में कार्यरत एक वन रक्षक की भी मुख्य भूमिका बताई जा रही है !
वन रक्षक के उपर ग्रामीणों के द्वारा और भी कई प्रकार के सनसनीखेज आरोप लगाए जा रहे हैं जो जांच का विषय है, परंतु जांच निष्पक्ष और सत्यता से परिपूर्ण हो !
क्योंकि श्री भागवत गीता में स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने कहा है ????

अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम्।
उदाराः सर्वभूतेषु नैरतप्यं न विद्यते॥”
अर्थात जो लोग छोटे दिमाग वाले होते हैं, वे यह सोचते हैं कि यह मेरा है और यह दूसरे का है। लेकिन जो उदार होते हैं, वे सभी प्राणियों में समान होते हैं और उनमें कोई भेदभाव नहीं होता। शासकीय कर्मचारियों को यह समझना चाहिए कि वे सभी के लिए काम करते हैं और किसी भी व्यक्ति या समूह के साथ भेदभाव नहीं करना चाहिए।

ग्रामीणों के द्वारा मामले की शिकायत उच्चाधिकारियों से करने के बाद जांच टीम तो पहुंची पर उनके द्वारा पण्ड्रापाठ थाना चौकी में ग्रामीणों पर ही “प्रशासनिक कार्य में बाधा” का मामला बनवा दिया गया है गरीब ग्रामीण और परेशान की अब जायें तो जायें कहां !
खैर पाठक सोच रहे होंगे कि ख़बर के बीच में मैंने श्री भागवत गीता के श्लोक और उसके भावार्थ को क्यों दर्शाया है तो उनकी जिज्ञासा शांत करने के लिए बताना आवश्यक है कि श्री भागवत गीता में भगवान श्री कृष्ण के कहे अनुसार शासकीय अधिकारी या कर्मचारी सभी का होता है उसे निष्पक्ष होकर न्याय करना चाहिए पर यहां ग्रामीण इसलिए संतुष्ट नहीं हैं क्योंकि दोषी कर्मचारी को संबंधित विभाग के एक जिम्मेदार कर्मचारी के द्वारा बचाने का अथक प्रयास किया जा रहा है, ग्रामीणों को डरा धमकाकर बात मनवाने की नाकाम कोशिश के बाद कानून का डर दिखाकर मामले को सलटाने की युक्ति प्रयोग में लाई जा रही है !
पर एक कहावत है ना कि ईश्वर सर्वत्र व्याप्त हैं, ग्रामीणों के कथन अनुसार जांच टीम में भी एक देवतुल्य अधिकारी हैं जिन्होंने ग्रामीणों से न्याय का वादा किया है और ग्रामीण उन अधिकारी महोदय के दिलासे से संतुष्ट हैं !
पर तहसील मुख्यालय में उच्चाधिकारी महोदय से वे जांच टीम में पण्ड्रापाठ वन विभाग के अधिकारियों कर्मचारियों को सम्मिलित नहीं करने की मांग लेकर आए थे किन्तु अवकाश होने के कारण उनकी मुलाकात उच्चाधिकारियों से नहीं हो पाई !

यदि छत्तीसगढ़ प्रदेश की श्री विष्णु देव साय जी की सरकार अगर इन सिधे साधे ग्रामीणों को निष्पक्ष न्याय दिलवाती है, दोषियों को दण्डित करती है, तब तो सुशासन त्योहार के मायने सही होंगे परन्तु यदि गरीब ग्रामीण न्याय के लिए दर दर भटकते रहे तो ऐसे में सुशासन त्योहार मनाना बेमानी होगी !!

????????जय हिन्द जय छत्तीसगढ़ ????????

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