शोहादा-ए-कर्बला कॉन्फ्रेंस में गूंजा पैग़ाम-ए-हुसैन, आतंकवाद और ज़ुल्म के खिलाफ उठी आवाज़

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

[responsivevoice_button voice="Hindi Female"]

चीर बग़ीचा, जशपुर में एक रूहानी और ऐतिहासिक शोहादा-ए-कर्बला कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया, जिसमें सैंकड़ों की संख्या में लोगों ने शिरकत कर शहीदाने कर्बला को खिराजे अकीदत पेश किया। इस पुर-असर महफ़िल में देशभर से आए जाने-माने उलमा, सूफ़िया और शायरों ने हिस्सा लिया।

Oplus_131072

मुख्य अतिथि के तौर पर तशरीफ़ लाए जबलपुर म.प्र. से पीरे तरीक़त हज़रत सैयद अरशद रब्बानी साहब ने एक दिल को छू लेने वाली तक़रीर पेश की। अपने बयान में उन्होंने फ़रमाया “इस्लाम का असल पैग़ाम अमन, मोहब्बत और इंसानियत है। जो भी ज़ुल्म, नाइंसाफी और दहशतगर्दी की राह पर चले, वो इस्लाम का पैरोकार नहीं हो सकता। यज़ीद इस्लाम का नहीं, इंसानियत का दुश्मन था। दुनिया का सबसे पहला आतंकी यज़ीद था जिसने हक़ की आवाज़ को कुचलना चाहा, मगर हज़रत इमाम हुसैन ने अपनी जान देकर इस्लाम और इंसाफ़ को ज़िंदा रखा। हम हुसैनी हैं, यज़ीदी नहीं। हमारी तालीम क़ुरान और अहलेबैत की मोहब्बत से है, न कि नफ़रत और फसाद से।”

उन्होंने नौजवानों को पैग़ाम देते हुए कहा कि
“दीन को समझो, सिर्फ लिबास या रस्मों तक महदूद मत करो। कर्बला सिर्फ एक मातम नहीं, बल्कि एक पैग़ाम है—ज़ुल्म के खिलाफ खड़ा होने का, और हक़ के लिए जान तक कुर्बान करने का। जब तक दुनिया में हुसैनी सोच ज़िंदा है, कोई यज़ीदियत सर उठा नहीं सकती।”

मौलाना मंसूर आलम ने भी अपने बयान में हज़रत हुसैन की कुर्बानी को इंसानियत के लिए आदर्श बताया। उन्होंने कहा “कर्बला इंसाफ़, सच्चाई और सब्र का मरकज़ है। हमें हुसैनी बनकर नफरतों का जवाब मोहब्बत से देना है। जब तक हम कर्बला से सीखते रहेंगे, ज़ुल्म का मुकाबला कर सकेंगे।”

????मनक़बत से गुलजार हुई महफ़िल

मौलाना अबरार क़ैसर, रेहान ख़ान रब्बानी, और मौलाना असरार अहमद ने अपने जज़्बाती अंदाज़ में मंक़बात-ए-हुसैन पेश की, जिससे पूरा माहौल रोशन और रूहानी हो गया। “लब्बैक या हुसैन” के नारों से महफ़िल बार-बार गूंज उठी।

Oplus_131072

कॉन्फ्रेंस में मुख्य रूप से हाफ़िज़ जन्नत कौसर, हाफ़िज़ आबिद हुसैन, हाफ़िज़ असलम, छत्तीसगढ़ राज्य वक़्फ़ बोर्ड के सदस्य फैज़ान सरवर खान, शब्बू क़ुरैशी, डॉ ज़ुल्फ़िक़ार सिद्दीक़ी, सैयद शकील सिद्दीक़ी, अधिवक्ता सिद्दीक आलम, महमूद क़ुरैशी, पत्रकार तनवीर क़ुरैशी, मोबीन खान, अब्दुल लतीफ अंसारी, शफीउल्लाह सिद्दीकी, इरफ़ान खान, मुर्शिद अंसारी, हय्यूल अंसारी, नादिर अंसारी, सैयद इश्फाक जमा, शमीम अहमद, अनवर खान, राज अंसारी, आफताब खान फत्तू, बिट्टू मलिक, दानिश अंसारी, सद्दाम अंसारी, भोलू खान, असलम खान, ज़ुबैर अंसारी, क़ैसर अंसारी, ज़ीशान रज़ा, शाहिद मलिक, शमशेर खान, मुन्नू कौसर, तस्लीम हुसैन, कुर्बान अंसारी, अय्यूब शाह, सद्दाम खान, चाँद खान, बेलाल अंसारी, कल्लू खान, वसीम खान, मुस्ताक अंसारी, अलीम खान, आरिफ खान, मोनू खान, कसिम अंसारी, रमीज़ खान, साजिद इमाम, बाबू अंसारी, शाहनवाज़ आलम सहित सैंकड़ो की संख्या में लोग मौजूद थे।

Leave a Comment

और पढ़ें

Best Flying School