सरगुजा संभाग में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता – सहायिकाओं का शक्ति प्रदर्शन, 21 सूत्रीय एजेंडे के साथ सरकार को दी चेतावनी

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अंबिकापुर

सरगुजा संभाग की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं ने अब अपने हक और अधिकार की लड़ाई को निर्णायक मोड़ देने का ऐलान कर दिया है। सरगुजा संभाग आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका संघ प्रतिनिधिमंडल के बैनर तले गांधी चौक स्थित श्री दुर्गा शक्ति पीठ, अंबिकापुर में दोपहर 11 बजे आयोजित विशेष बैठक में संभाग के सभी संगठनों ने एकजुट होकर बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया।

बैठक में जशपुर, बलरामपुर, अंबिकापुर, सूरजपुर, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी और कोरिया जिले के विभिन्न संघों व संगठनों के पदाधिकारी और प्रतिनिधिमंडल एक मंच पर एकत्र हुए। वर्षों से अलग-अलग संगठनों में बंटी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाओं ने पहली बार गुटबाजी को किनारे रखते हुए एक बैनर के नीचे एकजुट होने का संकल्प लिया। बैठक में स्पष्ट कहा गया कि यदि सरकार ने अब भी उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया तो संभाग स्तर पर बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं द्वारा कई संगठन बनाए गए हैं, जो समय-समय पर अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाते रहे हैं। लेकिन आज तक उनकी प्रमुख मांगें पूरी नहीं होने से नाराज कार्यकर्ताओं ने अब संयुक्त मोर्चा बनाकर सरकार से आर-पार की लड़ाई लड़ने का निर्णय लिया है।

कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर की गई। इसके बाद जशपुर जिले की कार्यकर्ताओं ने स्वागत गीत प्रस्तुत कर सभी प्रतिनिधियों का पुष्पगुच्छ से स्वागत किया।

बैठक को संबोधित करते हुए श्रीमती कविता यादव ने कहा कि यदि सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं एक मंच पर आ जाएं तो जीत तय है। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे मुद्दों पर अधिकारियों द्वारा दबाव और प्रताड़ना बनाई जाती है, लेकिन अब डरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसी भी समस्या के समाधान के लिए परियोजना अधिकारी से लेकर जिला कार्यक्रम अधिकारी और शासन-प्रशासन तक बात की जाएगी।

पुष्पा श्रेजल ने कहा कि सरकार को हमारी मांगें पूरी करनी ही होंगी। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जब भी हम अपनी मांगों को लेकर आगे बढ़ते हैं तो सबसे पहले पदाधिकारियों पर दबाव बनाया जाता है, लेकिन अब सभी को एकजुट होकर निडरता से आगे बढ़ना होगा। उन्होंने विभाग द्वारा दी जा रही गुणवत्ताहीन साड़ियों पर भी तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसी सामग्री का उठाव नहीं किया जाएगा।

बैठक में यह भी मुद्दा प्रमुखता से उठा कि कई आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं सेवानिवृत्त हो रही हैं, लेकिन उन्हें न तो पेंशन मिलती है और न ही कोई आर्थिक सुरक्षा। इस स्थिति को गंभीर बताते हुए सरकार से सेवानिवृत्त कर्मियों के लिए पेंशन व्यवस्था लागू करने की मांग की गई। साथ ही सेवानिवृत्त होने वाली दीदियों के सम्मान में सम्मान समारोह आयोजित करने का प्रस्ताव भी रखा गया।

सरगुजा से श्रीमती भुनेश्वरी सिंह ने कहा कि सभी मतभेदों को भूलकर एकजुट होना बेहद सराहनीय कदम है। उन्होंने कहा कि अब सरकार से नियमितीकरण की मांग को लेकर एकजुट होकर निर्णायक लड़ाई लड़ी जाएगी।

सुचिता मिश्रा ने भी इस बैठक को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि आज सभी संगठनों का एक मंच पर आना सकारात्मक संकेत है और इससे भविष्य की रणनीति मजबूत होगी।

बैठक में 21 सूत्रीय एजेंडे पर विस्तार से चर्चा की गई, जिसमें संगठनात्मक एकजुटता, हड़ताल-धरना में सामूहिक भागीदारी, नियमित वर्चुअल बैठक, संभाग स्तरीय व्हाट्सएप ग्रुप गठन, मीडिया समन्वय, मुख्यमंत्री-मंत्री से मुलाकात, न्यायालय में याचिका, दिल्ली में प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात, सेवानिवृत्त कार्यकर्ताओं की सूची तैयार करना और प्रशासनिक अधिकारियों के संपर्क नंबर एकत्रित करने जैसे महत्वपूर्ण निर्णय शामिल हैं।

बैठक के अंत में सभी प्रतिनिधियों ने एक स्वर में संकल्प लिया कि अब आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाओं के हक और अधिकार की लड़ाई पूरी मजबूती और एकजुटता के साथ लड़ी जाएगी।

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