घेवर बिना अधूरी है हरियाली तीज, जानें क्यों खास है ये मिठाई, यहां के घेवर की है गुजरात और मद्रास में बड़ी डिमांड

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 मनमोहन सेजू/बाड़मेर. हरियाली तीज में शादीशुदा महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुख-शांति के लिए व्रत रखती हैं. इस दिन महिलाएं भगवान शिव और माता गौरी की विधिवत पूजा करती हैं. इस व्रत में कई तरह के स्वादिष्ट पकवान भी बनते हैं उसी में से एक है घेवर है. बाड़मेर में बनने वाले घेवर भारत के कई राज्यों में बड़े चाव से खाया जाता है.

हरियाली तीज में जैसे सोलह श्रृंगार का विशेष महत्व है वैसे ही पश्चिम राजस्थान के सरहदी बाड़मेर में घेवर का विशेष महत्व होता है. भारत की संस्कृति और परंपराएं पूरे विश्व में मशहूर हैं. इसी का हिस्सा है हरियाली तीज का त्योहार जोकि राजस्थान में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है. हर साल सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को हरियाली तीज मनाई जाती है. इस साल हरियाली तीज 19 अगस्त को है. पति की लंबी आयु के लिए सुहागिन महिलाएं इस व्रत को करती हैं.

हरियाली तीज 19 अगस्त को
हरियाली तीज का व्रत करवा चौथ के व्रत के जैसा ही होता है. इसमे न तो कुछ खाया जाता है और न पिया जाता है. हरियाली तीज के दिन घेवर बनाने की मान्यता है. घेवर राजस्थान की डिश है. हरियाली तीज के दिन घेवर बनाकर माता पार्वती और भगवान शिव को भोग लगाया जाता है. घेवर दूध मैदा, घी, चीनी, केसर, बादाम, काजू के मिश्रण से बनाया जाता है. कमल सिंघल बताते है कि उनके यहां आधा किलो का एक पीस मिल रहा है जोकि काफी प्रचलन में है.

घेवर की कीमत 460 रुपये प्रति किलो
जोधपुर मिष्ठान भंडार के मालिक कमल सिंघल बताते है कि घेवर परंपरागत मिठाई है जोकि पिछले कई दशकों से चली आ रही है. इसका क्रेज राजस्थान के अलावा मद्रास,मुम्बई, बैंगलोर,गुजरात मे भी है. वह बताते है हरियाली तीज पर दूसरी मिठाइयों की तुलना में 80 फीसदी तक इसकी बिक्री होती है. सबसे खास बात यह है कि इसे बनाने के बाद ड्राई फ्रूट्स से इस तरह सजाया जाता है कि देखते ही खाने का मन करता है. यहां मिलने वाले घेवर की कीमत 460 रुपये प्रति किलो है. हरियाली तीज पर ज्यादातर मलाईदार घेवर की बिक्री हो रही है और इसे ड्राई फ्रूट्स से सजाया जाता है जोकि लोगों की पहली पसंदबना हुआ है.

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