✒️जशपुर जिला छत्तीसगढ़ प्रदेश भर में सबसे अलहदा जिला यु हीं नहीं कहलाता !
अलहदा कहने से मेरा तात्पर्य है “सबसे हटकर”,, मामला या विषय कुछ भी हो यहां के छुट्टभैय्याओं की उंगली हमेशा तैयार रहती है !
रही बात प्रशासनिक पुलिसिया व्यवस्था की तो जबसे जिले की सुरक्षा कमान पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह जी के हाथों में है तबसे खुराफातियों की चुलें हिली हुईं हैं !
जिले की सभी थाना और चौकियों की व्यवस्था चाक-चौबंद है, अपराधिक मामलों में गिरावट जारी है, अपराधियों के दिल में पुलिस कार्रवाई का खौफ घर करता जा रहा है ! असमाजिक तत्वों की नाक में नकेल कसती जा रही है,, “एसपी साहब कड़क हैं बचके रे बाबा” की सोच लिए अपराधी दुबके पड़े हैं,, पर हाय रे जशपुरिया राजनिति !
अच्छे कर्म हों या बुरे कर्म हों कुछ छुट्टभैय्याओं को परिणाम हमेशा अपने अनुरूप ही चाहिए ना तो आन्दोलन करी देंगे !
अब हाल ही की बात है बगीचा थाना के पण्ड्रापाठ चौकी क्षेत्रांतर्गत सुलेसा गांव के एक प्रार्थी संतकुमार यादव ने थाना चौकी पण्ड्रापाठ में रपट दर्ज कराई की उसकी साहीवाल नस्ल की दुधारू गाय जिसका दुध बेचकर वो अपने परिवार का पालन-पोषण करता है जिसे गांव के ही दो व्यक्तियों के द्वारा पत्थर मारकर लहुलुहान ( घायल) कर दिया गया है, गाय का पैर टुट चुका है जिसकी गवाही प्रत्यक्षदर्शियों द्वारा दी जा रही है !
संतकुमार यादव की निवेदित रपट की पड़ताल करने जब थाना चौकी पण्ड्रापाठ के नव पदस्थ प्रभारी मनेश्वर साहनी ग्राम सुलेशा पहुंच कर जब घटनाक्रम की पड़ताल करते हैं तो संतकुमार की रपट बिल्कुल सत्य प्रमाणित होती है !
जांच उपरांत चौकी प्रभारी वापस लौट आते हैं एवं आवेदक को दुसरे दिन प्रात काल चौकी पण्ड्रापाठ में बुलवाते है !
उक्त कार्यवाही की जानकारी जब अनावेदकों को प्राप्त होती है तो वे स्वयं चौकी पण्ड्रापाठ पहुंचते हैं जहां से उन्हें धारा 151 / 107, 116 (3) जा. फौ. के तहत न्यायालय सन्ना में पेश किया गया जहां से अनावेदकों को ज़मानत पर छोड़ा गया !
यदि इंसाफ के नजरिए से देखा जाए तो पुलिसिया कार्रवाई अक्षरत: न्याय संगत है किन्तु पाठक्षेत्र के कुछ विशेष लोगों को शायद जशपुर पुलिस का न्याय संगत रव्वैया नागवार गुजरा क्योंकि “मन्ने लागे है उनकी ना चली” तभी तो सोशल मीडिया के माध्यम से आन्दोलन वाली उंगली खड़ी की जा रही है !
बाकी पब्लिक है जो सब जानती है !!
जय हिन्द जय छत्तीसगढ़ ✊








