✍️ जशपुर जिले का सबसे दुरस्थ वनांचल क्षेत्र “ग्राम पंचायत खखरा” जो विकासखण्ड बगीचा के अन्तर्गत आने वाला जिले का अंतिम ग्राम पंचायत है, जो बलरामपुर जिले की सीमा से लगा हुआ है !

ग्राम पंचायत खखरा जिसकी भौगोलिक स्थिति काफ़ी जटिल और घुमावदार है, हालांकि शासन प्रशासन के कर कमलों से खखरा तक पहुंचने के लिए ग्राम पंचायत कवई से लगकर पक्की सड़क का निर्माण किया गया है जिससे ग्रामीणों को काफ़ी सहुलियत मिली है पर अभी भी ग्राम पंचायत खखरा के अधिनस्थ ऐसे बहुत से टोले, मोहल्ले हैं जहां सिर्फ पैदल ही पहुंचा जा सकता है ! परन्तु मुसलाधर बरसते बारिश के मौसम में नदी पार कर गांवों मोहल्लों तक पहुंचने में काफ़ी दुश्वारियों से जुझना पड़ता है !

बहरहाल कुछ जागरूक ग्रामीणों से मिली सुचना के तफ्तीश की नियत से हमारी खोजी टीम ग्राम पंचायत खखरा पहुंचीं

खखरा पहुंचने पर पता चला जिस जगह तक हमें पहुंचना है वहां तक सिर्फ़ पैदल ही पहुंचा जा सकता है और उस जगह का नाम है “नीमगांव” !

जी हां “नीमगांव” ग्राम पंचायत खखरा के अधिन एक मोहल्ला (टोला) है जहां महामहिम राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कोरवा समुदाय के लोग निवास करते हैं !

खैर हमारी खोजी टीम गिरते पड़ते सम्हलते किसी तरह नीमगांव पहुंच ही गई, जहां सुचना देने वाले ग्रामीण से हमारी मुलाकात हुई !
????(सुरक्षा के दृष्टिगत उक्त ग्रामीण का नाम लिखना उचित नहीं होगा )

और जब उस जागरूक ग्रामीण के द्वारा हमें उस स्थान पर ले जाया गया जिसकी तफ्तीश के लिए हमारी टीम गई थी तो उस स्थान को देखकर हमें रोना आ गया क्योंकि जिस बेरहमी से वहां साल के वृक्षों की हत्या की गई थी, जी हां “काटना” शब्द का प्रयोग करना अपने पेशे के साथ निहायत ही बेमानी होगी क्योंकि उन साल के सैकड़ों वृक्षों को सिर्फ काटा नहीं गया बल्कि बहुत ही निर्ममता से उनके हत्या की गई है ! इसमें सिर्फ़ हथियार चलाने वाले हाथ ही गुनहगार नहीं हैं, बल्कि इन वृक्षों की सुरक्षा के लिए न्युक्त किये गए वन विभाग के उन अधिकारियों कर्मचारियों का भी बराबर का दोष है जो सरकार से मिलने वाले मानदेय का भोग कर रहे हैं और अपने कर्तव्य के प्रति आंखें बन्द किए पड़े हैं !

पाठकों को जानकर हैरानी होगी कि “साल” के उन तैयार हो चुके जिवनदायिनी वृक्षों की हत्या के पिछे किसी लकड़ी तस्कर का हाथ नहीं है ना ही किसी लकड़ी माफिया का कोई योगदान है, इन बेजुबान वृक्षों की हत्या का कारण सिर्फ वन भुमि पर कब्ज़ा करना है जिसे नीमगांव के ही एक दबंग परिवार के सदस्यों के द्वारा किया जा रहा है !
जो पैसे और बाहुबल के दम पर पुरे नीमगांव के ग्रामीणों को दबाकर रखते हैं, रही बात वन विभाग के कर्मचारियों की तो उनकी तारीफ में कुछ भी कहना या लिखना बेकार होगा क्योंकि इस ख़बर के वायरल होने के बाद विभाग के उच्चाधिकारियों के द्वारा उन्ही लापरवाह कर्मचारियों को छानबीन की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, जिनकी लापरवाहियों के कारण इन सैकड़ों वृक्षों की निर्मम हत्या हुई है !

सर्वविदित है उसके बाद क्या होगा कार्यवाही के नाम पर हरियाली के हत्यारों से रुपए ऐंठे जाएंगे, कुछ रुपयों को चालान काटने के नाम पर सरकार के ख़ज़ाने में जमा करा दिया जाएगा तथा उच्चाधिकारियों की संतुष्टि के लिए कागज़ों पर कड़ी कार्रवाई दर्शायी जाएगी, पश्चात मामला रह जाएगा वहीं के वहीं क्योंकि रुपयों की लेन देन के बाद उन वृक्षों के हत्यारों का मनोबल और बड़ेगा, पहले तो वे सुचना देने वाले की “कुटाई” करेंगे फिर अपने भुमि विस्तार के काम में लग जाएंगे क्योंकि उनको भी पता है वनरक्षक आएगा तो उसे कितने की दक्षिणा चढ़ानी है !

जल जंगल जमीन के रक्षार्थ शासन प्रशासन को अब कड़े तेवर अपनाने होंगे, हरे भरे वृक्षों के हत्यारों को जेल की हवा खिलानी होगी, अपराधियों के दिल में वन विभाग का भौकाल स्थापित करना होगा, वृक्षों को काटने के लिए कुल्हाड़ी उठाने से पहले काटने वाले के दिमाग में सिर्फ़ एक बात आना चाहिए –
“अगर मैंने वृक्षों को काटा तो शासन प्रशासन मुझको काटेगा”



बहरहाल ग्राम पंचायत खखरा के नीमगांव जंगल में सैकड़ों वृक्षों को काटने वालों पर संबंधित विभाग क्या कार्यवाही करती है यह तो भविष्य के गर्त में है, परन्तु आशा ही नहीं वरन् पुर्ण विश्वास है मुख्यमंत्री महोदय का गृह जिला होने का फायदा हरे भरे वृक्षों को अवश्य मिलेगा और उनके हत्यारों पर कड़ी दंडात्मक कार्यवाही करते हुए प्रशासन उन्हें कारागार तक अवश्य पहुंचाएगी जो उन कट चुके वृक्षों के प्रति सरकार की सच्ची श्रद्धांजलि होगी !!























