✍️ आज दिसंबर महीने की सोलहवीं तारीख है, यूं तो पुरे छत्तीसगढ़ प्रदेश में ठंड बढ़ी हुई है पर जो कड़ाके की ठंड छत्तीसगढ़ के शिमला कहे जाने वाले जशपुर जिले के सन्ना पाठक्षेत्र में पड़ रही है उसकी बात ही निराली है !
पाठ में बिछी बर्फ़ की परतों पर जैसे ही सुर्य देव की किरणें पड़तीं हैं ,पुरा पाठ “सोने” की खदानों की तरह सुनहरे चमक से भर जाता है जिसकी खुबसूरती देखते ही बनती है!

वैसे भी इन दिनों पाठक्षेत्र से गुजरने वाले राहगीरों को सरसों के पीले फूल अनायास ही अपनी ओर इस शिद्दत से आकर्षित करते हैं कि राहगीर सेल्फी लेने को मजबुर हो जातें हैं! सन्ना पाठक्षेत्र की खुबसूरती किसी प्रकार के तारीफ की मोहताज नहीं है क्योंकि सिर्फ प्रदेश भर ही नहीं अपितु पुरे भारतवर्ष में सन्ना पाठक्षेत्र की खुबसूरती और “मिर्च की खेती” अपनी एक अलग साख रखती है !
पर जैसे खुबसूरत चांद में भी दाग नज़र आते हैं ठीक उसी तरह पाठक्षेत्र की खुबसूरती के पिछे भी कुछ बदनुमा दाग हैं जिसे मिटाने के वायदे तो हर पांचवे साल में विधानसभा चुनावों के दरमियान राजनेताओं के द्वारा किए जाते हैं, पर चुनाव के बाद “दाग” मिटाने की कोई कवायद नज़र नहीं आती !

बहरहाल जब से छत्तीसगढ़ प्रदेश की कमान जशपुर जिले के माटी पुत्र श्री विष्णु देव साय जी ने सम्हाली है तब से जशपुर जिले में विकास की बातें शुरू हो गईं हैं, सरकार के कहे अनुसार जिले में निवासरत जनता जनार्दन सुशासन के इंतजार में पलक पांवड़े बिछाए बैठे हैं कि जब प्रदेश के मुखिया “विष्णु भैय्या” बने हैं तो अपने जिले में भी विकास की बयार जरुर बहेगी !

ऐसा नहीं है कि सरकार जशपुर जिले के पठारी क्षेत्रों के विकास के योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं करती है चाहे वो कांग्रेस की सरकार रही हो या फिर भारतीय जनता पार्टी की सरकार हो, सरकारें अपना काम बखुबी करतीं हैं !
पर आम जनमानस तक सरकार के योजनाओं का फायदा नहीं पहुंच पाने का कारण बन रहे वो सरकारी मुलाजिम हैं, जो आम जनता के लिए सरकार से मिले सुविधाओं फायदों का लाभ गरीब ग्रामीणों तक ना पहुंचा के सिर्फ़ और सिर्फ़ अपने लोगों के उत्थान का काम करते हैं !
उदाहरणार्थ जशपुर जिले में कार्यरत किसी भी ग्राम पंचायत के अधिकारी (पंचायत सचिव) की तरक्की का अवलोकन कर के देखिए कि पन्द्रह वर्ष पहले जो खपरैल मकान में रहता था अपने कार्यस्थल तक आने जाने के लिए बमुश्किल दुपहिया वाहन के खर्चों का वहन करता था वो सिर्फ़ पंद्रह वर्ष पंचायत सचिव के पद पर आसीन होता है और फिर उसका घर राजाओं जैसा आलिशान महल बन जाता है अंगने दरवाजे पे ट्रैक्टर, पीक अप, कार खड़े नज़र आते हैं, ये अलग बात है कि वाहनों के स्वामी उन सचिव की पत्नियां, भाई, भतिजे यानी रिश्तेदार होते हैं ! यदि जशपुर जिले में जनपद पंचायत बगीचा के अंतर्गत ग्राम पंचायतों में ही पदस्थ पंचायत सचिवों की सम्पत्ति का यदि प्रशासन सलीके से अवलोकन कर ले तो सरकार के ज्ञान चक्षु खुल जाएंगे कि सरकारी योजनाओं का लाभ क्यों आम जनता तक नहीं पहुंच पाता !
ज्ञातव्य हो विगत कुछ दिनों पहले बगीचा विकासखण्ड मुख्यालय के अधिनस्थ ग्राम पंचायत कामारीमा के ग्रामीणों ने जशपुर जिले के यशस्वी कलेक्टर महोदय के जनदर्शन में जाकर कामारीमा ग्राम पंचायत सचिव के विरुद्ध कार्यवाही के लिए आवेदन दिया था जिसमें ग्रामीणों ने साक्ष्य के साथ पंचायत फण्ड के लाखों रुपए के गबन का हवाला देते हुए उचित कार्यवाही की मांग की थी !
सरकार के द्वारा ग्रामीण जनता के उत्थान उनके मुलभुत सुविधाओं के लिए जो धनराशि पंचायतों को उपलब्ध कराई जाती है, उस पैसे का सदुपयोग होता है या दुरुपयोग इसे जानने के लिए जिले में पदस्थ उच्चाधिकारियों को आम जनमानस तक पहुंचने की आवश्यकता है क्योंकि उच्चाधिकारियों के हाथों में योजनाओं के क्रियान्वयन सबंधी जो फाइलें सौंपी जाती है उन फाइलों में कार्य पूर्ण होता है !
उदाहरणार्थ सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है “नल जल योजना”, अब इस योजना की ही बात यदि की जाए तो जिले में पदस्थ उच्चाधिकारियों तक जो जानकारियां पहुंचाई गई होंगी उन फाइलों में “नल जल योजना” के पुर्ण होने की बातें लिखी होंगी पर यदि इस योजना की ज़मीनी हक़ीक़त देखी जाय तो पाठक्षेत्र में ही ऐसे सैंकड़ों गांव मिलेंगे जहां सिर्फ नल जल योजना के नाम पर गढ्ढे खोदकर पैसों का बंदरबांट कर लिया गया है !

खैर पाठक्षेत्र की जनता सब्र करना जानती है साथ ही उम्मीद कभी नहीं छोड़ती की आज नहीं तो कल जो हमारा है वो हमें जरूर मिलेगा,,बस जनता जनार्दन की चाहत का ख्याल जिला प्रशासन के उच्चाधिकारियों को करने की आवश्यकता है क्योंकि यदि जिले के उच्चाधिकारी सिर्फ फाइलों में विकास देखते रहे तो आम जनता को उनका हक मिल पाना मुश्किल है! आम जनता तक सरकार के योजनाओं का लाभ पहुंचवाने के लिए उन्हें कार्यालयों से निकलकर आम जनमानस तक पहुंचना होगा तभी सही मायनों में विकास की बयार जशपुर जिले के दुरस्थ अंचलों में बहेगी, तभी होगा मुख्यमंत्री महोदय के सुशासन का वादा पुरा !








