हेडपंप सालभर से खराब, नदी नालों का पानी पीने को मजबुर पहाड़ी कोरवा समुदाय, सुशासन के दावों पर पुजारकोना की हकीकत ने उठाए सवाल

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जशपुर/बगीचा

✍️जशपुर जिले के विकासखंड बगीचा अंतर्गत ग्राम पंचायत दनगरी के आश्रित ग्राम पुजारकोना में रहने वाले महामहिम राष्ट्रपति महोदय के दत्तक पुत्र पहाड़ी कोरवा समुदाय के सामने इन दिनों पेयजल का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। करीब 20 परिवारों की आबादी वाले इस गांव में पेयजल के लिए सरकार द्वारा खुदवाया गया एकमात्र हैंडपंप भी लगभग एक साल से खराब पड़ा है। ग्रामीणों का आरोप है कि बार-बार समस्या बताने के बावजूद ग्राम पंचायत के पदाधिकारी और जिम्मेदार अधिकारी गांव की सुध लेने तक नहीं पहुंच रहे हैं।

अतिविशिष्ट अनुसूचित जनजाति पहाड़ी कोरवा समुदाय के लोगों का कहना है कि हैंडपंप खराब होने के बाद वे मजबूरी में नदी-नालों के पानी पर निर्भर हैं। लेकिन लगातार बारिश के कारण नदी-नालों में बाढ़ का गंदा पानी आने से अब यहां पीने के पानी का संकट और गहरा गया है, ग्रामीणों को मजबूरी में दूषित पानी का इस्तेमाल करना पड़ रहा है !

पुजारकोना गांव में पेयजल व्यवस्था की तस्वीर सरकारी दावों पर सवाल खड़े करने वाली है। करीब 20 परिवारों के लिए एकमात्र हैंडपंप ही प्रमुख पेयजल स्रोत था, लेकिन लंबे समय से खराब पड़े इस हैंडपंप की मरम्मत नहीं होने से ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं।

ग्रामीणों के अनुसार, जिम्मेदारों को समस्या की जानकारी होने के बावजूद अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जब एक छोटे से गांव में खराब हैंडपंप को ठीक कराने में महीनों लग रहे हैं, तो फिर दूरस्थ और विशेष संरक्षित जनजाति के इन परिवारों तक मूलभूत सुविधाएं आखिर कब पहुंचेंगी?

पहले ग्रामीण नदी और नालों से पानी लाकर किसी तरह अपनी जरूरत पूरी कर रहे थे। लेकिन बारिश के बाद नदी-नालों में बाढ़ का गंदा पानी आने लगा है। यही पानी अब ग्रामीणों की मजबूरी बन गया है।

पेयजल जैसी बुनियादी जरूरत के लिए भी पहाड़ी कोरवा परिवारों का इस तरह संघर्ष करना प्रशासनिक व्यवस्था और ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

सरकार गांव-गांव तक मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने और अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाने के दावे करती है। लेकिन पुजारकोना की जमीनी तस्वीर इन दावों के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर रही है।

जहां करीब 20 परिवारों के लिए एक हैंडपंप ही पेयजल का सहारा हो और वह भी लगभग एक साल से खराब पड़ा हो, वहां ‘सुशासन’ की असली तस्वीर क्या है—यह सवाल अब जिम्मेदारों से जवाब मांग रहा है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि तत्काल खराब हैंडपंप की मरम्मत कराकर पेयजल व्यवस्था बहाल की जाए, ताकि बारिश के मौसम में उन्हें दूषित नदी-नालों के पानी पर निर्भर न रहना पड़े।

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