जशपुर/बगीचा
✍️जिस हैंडपंप को जिम्मेदारों ने करीब एक साल तक मुड़कर नहीं देखा, उसे एक खबर ने कुछ ही समय में चालू करा दिया।
ग्राम पंचायत दनगरी के आश्रित ग्राम पुजारकोना से सामने आई तस्वीर ने व्यवस्था के उन दावों पर सवाल खड़े कर दिए थे, जहां एक तरफ हर घर तक मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने की बात कही जाती है, वहीं दूसरी तरफ महामहिम राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र पहाड़ी कोरवा समुदाय के करीब 20 परिवार एक साल से पानी के लिए तरस रहे थे।
गांव का हैंडपंप खराब था।
शिकायतें थीं।
परेशानी थी।
मगर समाधान गायब था।
बारिश के दिनों में जब इन्हीं नदी-नालों का पानी मटमैला और गंदा हो जाता था, तब भी मजबूरी ऐसी कि उसी पानी से प्यास बुझानी पड़ती थी। सवाल सिर्फ एक हैंडपंप का नहीं था, सवाल था कि आखिर इन परिवारों की सुध कौन लेगा?
इसी सवाल को खबर के जरिए जिम्मेदारों के सामने रखा गया। खबर सामने आते ही जिम्मेदारों ने मामले को संज्ञान में लिया और करीब एक साल से बंद पड़े हैंडपंप की मरम्मत कर उसे चालू करा दिया।

लंबे इंतजार के बाद पानी मिलने से पहाड़ी कोरवा परिवारों में राहत है। घर के करीब पेयजल का साधन दोबारा मिलने से ग्रामीणों की बड़ी परेशानी फिलहाल दूर हुई है।
पुजारकोना की कहानी सिर्फ एक हैंडपंप के बनने की कहानी नहीं है। यह उस ताकत की कहानी है, जो ग्रामीणों की आवाज को खबर के जरिए जिम्मेदारों की चौखट तक पहुंचाती है।
अगर एक खबर के बाद हैंडपंप चालू हो सकता है, तो फिर एक साल तक ग्रामीणों की परेशानी पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या जिम्मेदारों को हर बार किसी खबर का इंतजार रहेगा?
अब उम्मीद यही है कि यह हैंडपंप दोबारा महीनों तक खराब न पड़ा रहे और इसकी नियमित देखरेख सुनिश्चित की जाए।
एक साल तक व्यवस्था खामोश रही…
खबर ने आवाज उठाई…
जिम्मेदार जागे…
और आखिरकार सूखे हैंडपंप से पानी निकल पड़ा।
यही है खबर का असर—
जहां आवाज दब गई थी, वहां खबर ने आवाज बना दी… और उस आवाज ने प्यासे गांव तक पानी पहुंचा दिया।






