ख़बर का बड़ा असर..फर्जी दस्तावेज़ पर गिरी गाज..मगर असली दोषी कौन, जो आज भी कानून की पकड़ से बाहर ?

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📢हल्लाबोल छत्तीसगढ़ न्यूज” की पड़ताल का बड़ा असर…..फर्जी दस्तावेज के सहारे बनी आंगनबाड़ी सहायिका की सेवा समाप्त, लेकिन असली गुनहगार अब भी बेनकाब होना बाकी  !

जशपुर/सन्ना

✍️भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई आसान नहीं होती। वर्षों से “हल्लाबोल छत्तीसगढ़ न्यूज” पाठ क्षेत्र में होने वाले भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और जनहित से जुड़े मामलों को बेखौफ होकर उजागर करता रहा है। अफसोस की बात यह है कि अधिकांश मामलों में जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति होती है, फाइलें धूल फांकती रहती हैं और दोषी कानूनी पेचों का सहारा लेकर बच निकलते हैं। दस मामलों में शायद ही एक ऐसा मामला होता है, जिसमें किसी दोषी तक कानून का शिकंजा वास्तव में पहुंचता हो।

कुछ महीने पहले महिला एवं बाल विकास विभाग, परियोजना कार्यालय सन्ना में आंगनबाड़ी सहायिका भर्ती को लेकर गंभीर शिकायतें सामने आई थीं। खबरों की सत्यता परखने के लिए “हल्लाबोल छत्तीसगढ़ न्यूज” ने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत संबंधित विभाग से दस्तावेज प्राप्त किए। जब इन दस्तावेजों की बारीकी से जांच की गई, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, एक अभ्यर्थी ने कथित रूप से फर्जी अंकसूची सहित अन्य दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति प्राप्त कर ली थी

जांच के दौरान भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी कई और गंभीर अनियमितताओं के संकेत भी मिले, लेकिन पर्याप्त दस्तावेजी साक्ष्य उपलब्ध न होने के कारण उन तथ्यों को सार्वजनिक नहीं किया गया। उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर “आंगनबाड़ी सहायिका भर्ती घोटाला” शीर्षक से खबर प्रमुखता से प्रकाशित की गई।

इस खबर का असर हुआ। जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लिया, उच्चस्तरीय जांच कराई और कई महीनों की प्रक्रिया के बाद संबंधित अभ्यर्थी की सेवा समाप्त कर दी। यह कार्रवाई इस बात का संकेत है कि व्यवस्था में आज भी ऐसे अधिकारी मौजूद हैं जो तथ्यों और नियमों के आधार पर निर्णय लेने का साहस रखते हैं।

लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल…

यदि दस्तावेज फर्जी थे, तो वे भर्ती प्रक्रिया की कई स्तरों की जांच पार कैसे कर गए?

क्या दस्तावेजों का सत्यापन केवल कागजों में हुआ?

क्या जांच प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही हुई?

या फिर पूरी व्यवस्था में कहीं न कहीं ऐसी कमजोर कड़ी मौजूद है, जिसकी वजह से फर्जी दस्तावेज आसानी से सरकारी फाइलों का हिस्सा बन जाते हैं?

इन सवालों के जवाब केवल एक व्यक्ति की सेवा समाप्त करने से नहीं मिलेंगे। यदि भर्ती प्रक्रिया में किसी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत हुई है, तो उसकी निष्पक्ष जांच भी उतनी ही जरूरी है।

“हल्लाबोल छत्तीसगढ़ न्यूज” जनहित से जुड़े ऐसे मामलों की पड़ताल आगे भी जारी रखेगा। महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली से जुड़े कई अन्य मामलों पर भी हमारी जांच जारी है। जैसे-जैसे तथ्यों और साक्ष्यों की पुष्टि होगी, उन्हें जनता के सामने पूरी जिम्मेदारी के साथ प्रस्तुत किया जाएगा।

👉सवाल अभी खत्म नहीं हुआ है… यह तो सिर्फ शुरुआत है।

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