सन्ना
✍️जशपुर जिले के बगीचा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत सन्ना का बस स्टैंड वर्षों से ‘गांधी चौक’ के नाम से जाना जाता है। यहां राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा स्थापित है, जहां हर वर्ष स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर क्षेत्र के वरिष्ठ नागरिक एवं गणमान्य लोग माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। लेकिन इस बार 15 अगस्त से ठीक पहले गांधी चौक की बदहाल तस्वीर ने व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बताया जा रहा है कि कई महीने पहले कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा महात्मा गांधी की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त कर दिया गया था। इतना ही नहीं, प्रतिमा स्थल को भी नुकसान पहुंचाया गया। घटना की जानकारी ग्रामीणों द्वारा संबंधित थाना और ग्राम पंचायत को दी गई, लेकिन महीनों गुजर जाने के बावजूद न तो प्रतिमा को पूर्व स्वरूप में लाया जा सका और न ही जिम्मेदारों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई सामने आई है।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा की यह स्थिति देखकर ग्रामीणों में नाराजगी के साथ-साथ असमंजस भी है। लोगों का कहना है कि जिस महापुरुष ने देश की आजादी के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया, उनकी प्रतिमा की मरम्मत तक के लिए महीनों से इंतजार करना पड़े, तो यह व्यवस्था की संवेदनशीलता पर बड़ा सवाल है।
15 अगस्त में अब महज दो दिन शेष हैं। पूरा देश स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों में जुटा है। सरकारी और सामाजिक संस्थानों में तिरंगा फहराने से लेकर महापुरुषों को श्रद्धांजलि देने की तैयारियां चल रही हैं। वहीं सन्ना के गांधी चौक पर राष्ट्रपिता की क्षतिग्रस्त प्रतिमा आज भी अपने उद्धार की बाट जोह रही है।
हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी स्वतंत्रता दिवस पर गांधी प्रतिमा पर माल्यार्पण की परंपरा निभाई जाएगी। लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बार भी टूटी-फूटी प्रतिमा पर ही माल्यार्पण कर आजादी के जश्न की शुरुआत की जाएगी?
ग्रामीणों के बीच यह सवाल तेजी से चर्चा का विषय बन गया है कि आखिर महात्मा गांधी की प्रतिमा को ठीक कराने में इतनी देरी क्यों हुई? क्या जिम्मेदारों को स्वतंत्रता दिवस का इंतजार था, या फिर किसी बड़े हादसे के बाद ही व्यवस्था जागेगी?
ग्रामीणों ने प्रशासन एवं पंचायत से मांग की है कि स्वतंत्रता दिवस से पहले गांधी प्रतिमा की तत्काल मरम्मत कराई जाए, प्रतिमा स्थल को व्यवस्थित एवं सम्मानजनक स्वरूप दिया जाए तथा प्रतिमा को क्षतिग्रस्त करने वाले असामाजिक तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
गांधी चौक की टूटी प्रतिमा अब सिर्फ एक क्षतिग्रस्त मूर्ति का मामला नहीं, बल्कि राष्ट्रपिता के सम्मान और प्रशासनिक संवेदनशीलता से जुड़ा सवाल बन चुकी है।








