जशपुर
✍️छत्तीसगढ़ प्रदेश के आदिवासी बाहुल्य जशपुर जिले में रविवार को विश्व आदिवासी दिवस की धूम देखने को मिली। जिले के अलग-अलग हिस्सों में आदिवासी समाज के लोगों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों, गीत-संगीत, नृत्य और उत्साह के साथ इस विशेष दिन को मनाया। सुबह से ही गांवों और कस्बों में उत्सव जैसा माहौल नजर आया और चारों ओर आदिवासी संस्कृति एवं परंपराओं की अनूठी झलक देखने को मिली।

विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर जिले के पाठ क्षेत्र सन्ना से लेकर निचघाट बगीचा, कांसाबेल, कुनकुरी सहित विभिन्न क्षेत्रों में समाज के लोग बड़ी संख्या में एकत्रित हुए। पारंपरिक वेशभूषा में सजे महिला-पुरुष, युवा और बच्चे कार्यक्रमों में शामिल हुए और मांदर की थाप तथा पारंपरिक गीतों पर जमकर थिरके।

इस दौरान आदिवासी समाज के लोगों ने अपनी समृद्ध संस्कृति, परंपरा, भाषा और सामाजिक एकजुटता का संदेश दिया। जगह-जगह आयोजित कार्यक्रमों में लोगों ने एक-दूसरे को विश्व आदिवासी दिवस की शुभकामनाएं दीं और आपसी भाईचारे के साथ इस दिन की खुशियां साझा कीं।

जशपुर की धरती पर आदिवासी संस्कृति की यह जीवंत तस्वीर देखते ही बन रही थी। पारंपरिक गीतों की गूंज, मांदर की थाप और सामूहिक नृत्य ने पूरे वातावरण को उत्सव के रंग में रंग दिया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर उम्र के लोग इस आयोजन में उत्साह के साथ शामिल हुए।

विश्व आदिवासी दिवस ने एक बार फिर जशपुर की समृद्ध आदिवासी विरासत, सांस्कृतिक विविधता और सामाजिक एकता को सामने लाने का काम किया।

जिलेभर में हुए आयोजनों ने यह संदेश दिया कि आधुनिकता के साथ कदमताल करते हुए भी आदिवासी समाज अपनी जड़ों, परंपराओं और संस्कृति को मजबूती से संजोए हुए है।







